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तीन संदिग्ध मरीजों के गांव पहुंचने से ग्रामीणों में मचा हडकंप

तीन संदिग्ध मरीजों के गांव पहुंचने से ग्रामीणों में मचा हडकंप

तीन संदिग्ध मरीजों के गांव पहुंचने से ग्रामीणों में मचा हडकंप स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी व थानाध्यक्ष को सूचना देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई चिकित्सकों द्वारा सेल्फ क्वारंटाइन के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे बाहर से आए लोग जालौन, 29 मार्च (हि.स.)। एक ओर जहां कोरोना संक्रमण को लेकर पूरे देश में हा—हा कार मचा है। वहीं स्थानीय

स्तर पर कड़े कदम न उठाए जाने से बाहर से आ रहे लोगों की जांच न होने से बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। ऐसा ही मामला रविवार को डकोर ब्लाक के मुहम्मदाबाद गांव में सामने आया। यहां पर दिल्ली से आए तीन युवकों को उरई में चिकित्सकीय परीक्षण के लिए ले जाया गया था। जहां चिकित्सक ने उन्हें सेल्फ क्वारंटाइन की सलाह दी थी। लेकिन गांव पहुंचने के बाद इन्होंने इस निर्देश को ताक पर रखते हुए लोगों से मिलना जुलना शुरू कर दिया। इससे ग्रामीणों में दहशत है। पुलिस व स्वास्थ्य महकमे को जानकारी देने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डकोर ब्लाक के मुहम्मदाबाद गांव निवासी तीन युवक दिल्ली में रहकर मजदूरी का काम करते थे। लॉक डाउन के बाद वह किसी तरह शनिवार की रात उरई पहुंच गए। यहां पर पुलिस की नजर जब इन पर पड़ी तो उनसे पूछताछ की गई। इसके बाद इन्हें जांच के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने तीनों युवकों को तीन दिन के सेल्फ क्वारंटाइन में रहने की सलाह दी और इस दौरान लोगों व परिजनों से न मिलने को कहा। इसके बाद यह युवक रात में ही गांव पहुंच गए। यहां पर यह घर के लोगों के बीच तो बैठे ही, साथ ही सुबह होते ही गांव के लोगों से भी मिलना जुलना शुरू कर दिया। इससे गांव के जागरुक लोगों में दहशत फैल गई। उन्होंने इसकी जानकारी डकोर कोतवाल बीएल यादव व डकोर स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. इदरीश को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद रविवार की सुबह करीब 11 बजे डा. इदरीश गांव तो पहुंचे, लेकिन उनके पास कोरोना का संक्रमण जांचने के लिए कोई उपकरण नहीं था। इसलिए उन्होंने दिल्ली से आए युवकों से दूर खड़े होकर पूछताछ की और उनसे कोरोना के लक्षणों के बारे में पूछा। जिस पर युवकों ने कोई भी लक्षण अपने अंदर होने से मना कर दिया। इसके बाद वह खानापूर्ति कर गांव से वापस चले गए। इससे ग्रामीणों का गुस्सा और भी भड़क गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इन युवकों में एक की हालत तो इतनी खराब है कि वह ठीक तरीके से सांस भी नहीं ले पा रहा है। लेकिन बिना किसी जांच पड़ताल के इन लोगों को गांव के लोगों के बीच मिलने जुलने के लिए छोड़ दिया गया। ऐसे में लोगों को डर है कि कहीं यह महामारी गांव में न फैल जाए। बहरहाल देर शाम तक पुलिस या स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। हिन्दुस्थान समाचार/अनिल/मोहित
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