श्रीरामचरितमानस-शिक्षा-की-प्रासंगिकता
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श्रीरामचरितमानस-शिक्षा की प्रासंगिकता

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संस्कृत साहित्य में आदि महाकवि वाल्मीकिजी ने रामायण की रचना कर सर्वप्रथम श्रीरामकथा को एक विस्तृत आयाम दिया है। यह हमारा दुर्भाग्य रहा कि धीरे-धीरे संस्कृत भाषा हमसे दूर होती चली गई। गोस्वामी तुलसीदासजी ने श्रीरामकथा को जनमानस की जनभाषा में सरल-सुबोध भाषा में प्रकट कर भारतीयों में घर-घर पारायण क्लिक »-ananttvlive.com