शिवम आटो मोटिव में विधि विधान से की गई विश्वकर्मा जी की पूजा
शिवम आटो मोटिव में विधि विधान से की गई विश्वकर्मा जी की पूजा
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शिवम आटो मोटिव में विधि विधान से की गई विश्वकर्मा जी की पूजा

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कोरबा 17 सितम्बर (हि स) । देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा जी के जयंती पर शिवम आटो मोटिव में पूरे विधि विधान से पूजा संपन हुआ इसमें कोविड 19 को ध्यान में रखते हुए शारीरिक दूरी का पालन हुआ। उक्त पूजन कार्यक्रम में छततीसगढ़ राज्य कृषि एवं ग्रामीण बैंक के पूर्व अध्यक्ष देवेन्द्र पाण्डेय साथ शुशील पांडेय ,शिवम पांडेय व स्टाप मौजूद रहे । दरअसल, विश्वकर्मा जी के जन्म को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। कुछ लोगों का मानना है कि भगवान विश्वकर्मा का जन्म अश्विन मास की कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुआ। वहीं, कुछ धर्मपंडितों का मानना है कि उनका जन्म भाद्रपद मास की अंतिम तिथि को हुआ। इन दोनों से अलग सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार विश्वकर्मा पूजन का मुहूर्त सूर्य के परागमन के आधार पर तय किया जाना चाहिए। यह दिन आमतौर पर हर साल 17 सितंबर को ही पड़ता है। इसलिए विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को मनाया जाता है। वैसे एक मान्यता ये भी है कि माघ माह की त्रयोदशी के दिन विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ था। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार कहा जाता है। मान्यता है कि उन्होंने ही देवताओं के महल, स्वर्ग का निर्माण किया। साथ ही उन्होंने ही इंद्रपुरी, यमपुरी, महाभारत काल की द्वारिका, हस्तिनापुर नगरी सहित त्रेतायुग में रावण की लंका का निर्माण किया था। साथ ही उन्होंने देवताओं के अस्त्र-शस्त्र का भी निर्माण किया। इसमें भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शंकर का त्रिशूल, यमराज का कालदंड आदि शामिल हैं। हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी-hindusthansamachar.in