शबरी मार्ट से जुड़ी महिलाएं बनी आत्मनिर्भर
शबरी मार्ट से जुड़ी महिलाएं बनी आत्मनिर्भर
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शबरी मार्ट से जुड़ी महिलाएं बनी आत्मनिर्भर

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रायपुर 13 सितम्बर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा जा रहा है इससे ग्रामीण महिलाएं अब स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा चुकी हैं। एक ओर जहां शासन द्वारा क्रियाशील गोठान में अपना वक्त देकर वे अतिरिक्त आय कमा रही हैं वहीं स्व सहायता समूहों से जुड़कर विविध प्रकार के रोजगार मूलक कार्यों में संलग्न होकर प्रगति की ओर अग्रसर हो रही हैं। सुकमा जिले में लगभग 1215 महिला स्व सहायता समूह क्रियाशील हैं जिनसे लगभग 12 हजार महिलाएं जुड़ी हुई हैं और अपनी कलात्मकता और नवाचार का परिचय देते हुए स्थानीय संसाधनों का प्रयोग कर नित नए उत्पाद बना रहीं हैं। इन उत्पादों को शासन को या बाजार में विक्रय कर आर्थिक लाभ के साथ आत्मसम्मान भी कमा रहीं हैं। पिछले दिनों सुकमा में उद्योग मंत्री कवासी लखमा द्वारा शबरी मार्ट का उद्घाटन किया गया था। शबरी मार्ट जिले की महिलाओं द्वारा संचालित की जाने वाली एक ऐसी इकाई हैं जहां महिला स्व सहायता समूहों के बनाए गए उत्पादों की बिक्री की जाती हैं। मार्ट में साबुन, मसाले, आचार, दोना पत्तल, सैनिटरी नैपकिन, फिनायल सहित अन्य प्रकार के उत्पाद आम जन के लिए उपलब्ध हैं जो पूर्णतः जिले के ही महिला स्व सहायता समूहों द्वारा निर्मित हैं। शुभारंभ के दो दिन के भीतर ही शबरी मार्ट को एक बड़ी आर्थिक लाभ हुई है। छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड, पर्चनपाल जगदलपुर के द्वारा शबरी मार्ट से 26 हजार 383 रुपये के उत्पाद क्रय किए गए हैं। स्व सहायता समूह की महिलाओं में इससे खुशी का माहौल हैं। उन्होंने बताया कि उदघाटन के दो दिन बाद ही इतनी बड़ी खरीदी होने से समूह की महिलाओं को प्रोत्साहन मिला हैं अब वे और लगन और जुझारू होकर मार्ट के लिए उत्पाद तैयार करेंगी। शबरी मार्ट में उपलब्ध हर उत्पाद महिलाओं द्वारा स्वयं निर्मित किया गया है। इसीलिए इसकी गुणवत्ता अच्छी और कीमत भी किफायती है जो बाजार में मिलने वाले रासायनिक उत्पादों से बेहतर हैं। जिले के कलेक्टर चंदन कुमार ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा है कि ग्रामीण अंचल की महिलाएं भी खुद अपनी आर्थिक उन्नति की ओर बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि शबरी मार्ट सुकमा की महिला स्व सहायता समूहों के लिए स्वावलंबन, सहभागिता और संवर्धन का पर्याय बन रही है। हिन्दुस्थान समाचार / गेवेन्द्र-hindusthansamachar.in