रविवासरीय संगीत सभा में  लालाराम लोनिया ने शास्त्रीय गायन से बांधा समां
रविवासरीय संगीत सभा में लालाराम लोनिया ने शास्त्रीय गायन से बांधा समां
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रविवासरीय संगीत सभा में लालाराम लोनिया ने शास्त्रीय गायन से बांधा समां

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रायपुर, 20 दिसम्बर (हि.स.)। गुनरसपिया फाउंडेशन की 27 वी संगीत सभा में रविवार को बिलासपुर के युवा शास्त्रीय गायक लालाराम लोनिया ने सुंदर शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। युवा प्रतिभावान लालाराम लोनिया गायन और वादन के क्षेत्र में एक सुपरिचित और सशक्त हस्ताक्षर हैं । लालाराम ने खैरागढ़ से स्नातकोत्तर की उपाधि ली। वे प्रसिद्ध गुरु पंडित सतीश इंदुरकर के शिष्य हैं। लालाराम ने अपने गायन की शुरुआत राग-वृन्दावनी सारंग से की सबसे पहले उन्होंने विलंबित झपताल की बंदिश- हाँ श्याम मोरी, इसके बाद-त्रिताल में-खेले श्याम संग होरी,ताल-एकताल में श्याम नंदलाल मेरो,ले गयो मन मेरो की सुंदर प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने गायन का समापन राग भूपाली पर आधारित स्वरचित भजन-हे गणराज से किया। कार्यक्रम में तबले पर भिलाई के राम सरपे ने व हारमोनियम पर भिलाई के परन राज भाटिया ने सुंदर संगत की। कलाकारों ने सवाल-जवाब के सुंदर तालमेल से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रोताओं ने पूरे कार्यक्रम में लगातार तारीफ़ें और अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। गुनरस पिया फाउंडेशन द्वारा कोरोना काल में देश-विदेश के कलाकारों को फेसबुक के माध्यम से कार्यक्रम प्रस्तुति हेतु अवसर दिया जा रहा है। गुनरस पिया फाउंडेशन शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं प्रचार प्रसार हेतु लगातार कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के संयोजक दीपक व्यास ने यह जानकारी दी। हिन्दुस्थान समाचार/ गायत्री प्रसाद-hindusthansamachar.in