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 बार-बार अपील के बावजूद जेएनयू छात्रों ने जारी रखा आंदोलन : निशंक

बार-बार अपील के बावजूद जेएनयू छात्रों ने जारी रखा आंदोलन : निशंक

नई दिल्ली, 9 दिसम्बर (आईएएनएस)। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय मुद्दे पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि विश्वविद्यालय प्राधिकारियों द्वारा बार-बार अपील किए जाने के बावजूद विद्यार्थियों ने अपना आंदोलन जारी रखा।
निशंक ने सोमवार को लोकसभा में कहा, जेएनयू की कार्यकारी परिषद ने छात्रावास की टाइमिंग और ड्रेस कोड से संबंधित प्रस्तावित खंड को

छात्रावास नियमावली में शामिल न करने का निर्णय लिया। ईसी ने छात्रावास शुल्कों में भी संशोधन किया पर फिर भी छात्रों ने आंदोलन जारी रखा।केंद्रीय मंत्री का कहना है कि जेएनयू में पिछले 40 वर्षो से छात्रावास शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई और अब इसमें संशोधन का प्रस्ताव है। निशंक ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा कोई बड़ी फीस वृद्वि नहीं की गई। परिसर में मुक्त आवाजाही और फीस के भुगतान पर भी कोई प्रतिबंध नहीं है, न ही मेस में कोई ड्रेस कोड है। इस मौके पर निशंक ने जेएनयू की प्रशंसा करते हुए कहा कि जेनएयू भारत के अग्रणी विश्वविद्यालयों में से एक है और एनआईआरएफ की रैकिंग में यह दूसरे स्थान पर है। मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा, लगभग पिछले दो दशकों से जेएनयू के शिक्षण शुल्क में जोकि 300 रुपये प्रतिवर्ष से कम है, कोई परिवर्तन नहीं हुआ। साथ ही, इसके लगभग 70 प्रतिशत विद्यार्थी छात्रवृति प्राप्त कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन से ज्ञात हुआ है कि इसके छात्रावासों के कमरों का किराया जोकि लगभग 40 वर्ष पूर्व 10 और 20 रुपये प्रतिमाह थे विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें बढ़ाकर क्रमश: 300 रुपये व 600 रुपये किया गया है। वहीं बर्तन और सेवा शुल्क एक हजार रुपये प्रतिमाह लगाया गया है।निशंक के मुताबिक, बीपीएल श्रेणी के छात्रों के लिए डबल रूम छात्रावास का किराया 300 की जगह 150 व सिंगल रूम का किराया 600 की जगह 300 रूपये का प्रस्ताव है। वहीं बीपीएल श्रेणी के छात्रों से बर्तन व सेवा शुल्क भी 1000 की जगह 500 रुपये लेने का संशोधित प्रस्ताव है।निशंक ने कहा कि जेएनयू प्रशासन ने 40 वर्ष बाद हॉस्टल शुल्क में इसलिए संशोधन किया है ताकि बिना किसी लाभ-हानि के आधार पर रख-रखाव के खर्च को पूरा किया जा सके। परंतु छात्रों ने इस फीस वृद्वि के खिलाफ शिकायत की इसलिए मंत्रालय ने एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है जो सभी हितधारकों के साथ परामर्श कर समाधान ढूंढ रहा है। इस दौरान जेएनयू प्रशासन ने छात्रावास प्रभार को संशोधित करके कम कर दिया है।निशंक ने कहा, सुझावों की समीक्षा करने के बाद उच्चस्तरीय समिति ने सभी विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत और बीपीएल छात्रों को अनुमोदित दरों पर 7 प्रतिशत छूट की सिफारिश की जिसे कार्यकारी परिषद द्वारा परिपत्रों के माध्यम से उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश को अनुमोदित कर दिया गया है।--आईएएनएस
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