बस्तर दशहरा काछन गादी-रैला देवी पूजा विधान 16 को
बस्तर दशहरा काछन गादी-रैला देवी पूजा विधान 16 को
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बस्तर दशहरा काछन गादी-रैला देवी पूजा विधान 16 को

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जगदलपुर,15 अक्टूबर (हि.स.)। बस्तर संभाग में मनाये जाने वाले रियासत कालीन एतिहासिक विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में काछन गादी-रैला देवी के द्वारा दशहरा पर्व निर्विघ्र संपन्नता के साथ पारंपकि पूजा विधान 16 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 31 अक्टूबर मांई जी की विदाई के साथ बस्तर दशहरा का परायण होगा, लेकिन कोरोना के खतरे को देखते हुए इस वर्ष बस्तर दशहरा के प्रत्येक अनुष्ठान में कर्फ्यू का साया रहेगा, पूरे नगर में संघ्या 05 बजे के बाद कर्फ्यू लगा दिया जाएगा। साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बस्तर दशहरे में शामिल होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस बार पर्यटकों को बस्तर आने की अनुमति नहीं होगी, इसके अलावा नगर के लोग भी बस्तर दशहरा के अनुष्ठानों में शामिल नहीं हो पाएंगे। कोविड के खतरेको देखते हुए रथ खींचने आने वाले ग्रामीणों की भी लगातार एंटीजन किट से टेस्ट किया जाएगा, पॉजिटिव पाये जाने पर उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। कलेक्टर बस्तर रजत बंसल ने बस्तर दशहरे के संबंध में बताया कि इस बार बस्तर दशहरे के समस्त अनुष्ठानों में जिनकी अहम भूमिका रहती है, उन्हें ही शामिल होने की अनुमति होगी। पर्व में अत्यधिक भीड़ ना उमड़े इसलिए प्रत्येक ग्राम पंचायतों और सभी जिलों के जिलाधीशों से संपर्क कर कम से कम लोगों को पर्व में भेजने अनुरोध किया गया है। उन्हें यह भी कहा गया है कि जो भी देवी-देवता बस्तर दशहरा में शामिल होने आते हैं, उनकी संख्या भी कम की जाए। हिन्दुस्थान समाचार/ राकेश पांडे-hindusthansamachar.in