नही रहे देश के जाने माने शायर, लेखक और उर्दू के विद्वान जनाब हयात रिजवी
नही रहे देश के जाने माने शायर, लेखक और उर्दू के विद्वान जनाब हयात रिजवी
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नही रहे देश के जाने माने शायर, लेखक और उर्दू के विद्वान जनाब हयात रिजवी

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–इंग्लैंड तथा यूरोप के देशों में भी लोकप्रिय थी हयात रिजवी की किताबें कोंडागाँव 22 सितंबर (हि.स.)। जाने माने शायर व अंग्रेजी के विद्वान हयात भाई रिजवी का आज सुबह सुबह अचानक हृदय गति रुकने से इंतकाल हो गया। खबर पर समूचा साहित्य जगत भाव शून्य है, देश के हरदिल अज़ीज़ शायर, हिंदी और उर्दू व अंग्रेजी के बहुत बड़े जानकार, मजहबी एकता के पैरोकार जनाब हयात रिजवी साहब। आप छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य परिषद के कोंडागांव इकाई के संरक्षक और प्रमुख आधार स्तंभ थे। उनकी शेर और ग़ज़लें पूरा देश गुनगुनाता रहा है। उर्दू अदब की दुनिया में आपका नाम बड़े अदब के साथ लिया जाता है। उनकी लिखी और हालिया प्रकाशित महत्वपूर्ण किताब मेरा पैगाम मोहब्बत है हिंदू मुस्लिम एकता के लिए न केवल एक मील का पत्थर है, बल्कि हमारे देश व समाज की सदियों से कायम बेहद खूबसूरत समावेशी जीवनशैली की बुनियाद और आधारशिलाओं को और मजबूत बनाने वाली बेमिसाल मशाल है। हिन्दुस्थान समाचार/ राजीव गुप्ता-hindusthansamachar.in