नक्सलियों के दबाव  में 10 गांव के ग्रामीणों ने पुलिस कैंप खोलने का किया विरोध
नक्सलियों के दबाव में 10 गांव के ग्रामीणों ने पुलिस कैंप खोलने का किया विरोध
news

नक्सलियों के दबाव में 10 गांव के ग्रामीणों ने पुलिस कैंप खोलने का किया विरोध

news

दंतेवाड़ा, 07 सितंबर(हि.स.)। जिले के कटेकल्यान ब्लॉक के टेटम पंचायत में पुलिस कैम्प स्थापना की सुगबुगाहट पर 10 गांवों सूरनार, टेलम, टेटम, एटेपाल, डब्बा, कुन्ना, जियाकोड़ता,खालेटेटम, नयानार के सरपंचों के साथ सैकड़ों ग्रामीणों ने नक्सलियों के दबाव में कैम्प के विरोध में प्रदर्शन किया है। यहां यह बताया जाना आवश्यक है कि ग्रामीण भी कैंप खुले यह चाहते हैं, नक्सल दहशत के दबाव में ग्रामीण कैंप का विरोध करते हुए दिखते हैं। जिसे ध्यान में रखते हुए बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित इलाकों से पूरी तरह से नक्सल मुक्त करने के लिए हर 05किमी में एक कैंप खेले जाने की रणनीति पर लगातार कार्य जारी है विरोध प्रदर्शन में जुटे ग्रामीणों की ओरसे टेलम के सरपंच भीमाराम मंडावी ने कहा कि गांव में नल, बिजली, पानी,स्वास्थ्य जैसे मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकताओं को पूरा करे फिर पुलिस कैम्प लगाये। डब्बा गांव के सरपंच अनिल कुमार मुचाकी ने कहा कि पुलिस कैम्प नक्सल प्रभावित इलाकों में लगाकर ग्रामीणों को और दिक्कत में डाल रहे हैं, क्योंकि बीते वर्ष पोटाली और चिकपाल में कैम्प लगने के बाद से ग्रामीणों की हत्या और पिटाई भी हुई है। नक्सलियों ने कुछ वारदात को अंजाम दिया था, जिसका जिक्र सरपंच अनिल कुमार मुचाकी ने किया है।उल्लेखनीय है कि बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों के 45 बटालियन तैनात है। पूर्व में स्वीकृत सीआरपीएफ की 07बटालियन उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार ने मांग की है। अंदरूनी क्षेत्रों में कैंप के खुलने की बात सामने आती है तो नक्सलियों के द्वारा ग्रामीणों पर दबाव बनाकर कैंप का विरोध करने के लिए आगे कर दिया जाता है। कटेकल्याण ब्लॉक के 10 गांवों का विरोध इसी का एक हिस्सा है, यह सर्वविदित है। जब तक अंदरूनी क्षेत्रों में कैंप की स्थापना नहीं हुई थी तब तक ग्रामीण कैंप का विरोध नहीं करते थे, लेकिन अब लगातार नक्सल प्रभावित अंदरूनी क्षेत्रों में कैंप के खुलने की प्रक्रिया जारी है, जिसके कारण कैंप का विरोध जैसा कि पहले भी किया जा चुका है, किया जा रहा है। बावजूद इसके कैंप खुले हैं, कैंप के खुलने के बाद विरोध समर्थन में बदलते भी देखा जा सकता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण दंतेवाड़ा जिले का पोटाली और चिकपाल कैंप है, जहां विरोध के बाद कैंप खोला गया था। जिसका लाभ ग्रामीणों ने महसूस किया है, जिसे वहां जाकर प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी के अनुसार आनेवाले दिनों में धुर नक्सल प्रभावित इलाकों में 07 कैंप कोरोना के कारण नही खोले जा सके ,जिसे खोले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।जैसे ही अंदरूनी क्षेत्रों में कैंप स्थापित हो जाता है, वैसे ही ग्रामीण जवानों और कैंप दोनों का समर्थन करते हैं। क्योंकि कैंप के खुलने के साथ ही नक्सलियों का दबाव कम हो जाता है। और वहां मूलभूत सुविधाएं सड़क, बिजली, पानी राशन की दुकान के साथ ही नक्सलियों के आतंक के कारण अवरूध्द ग्राम के विकास की अन्य योजनाएं शुरू हो जाते हैं, जिसका एहसास ग्रामीणों को होने के बाद वे स्वयं जवानों और कैंप दोनो का खुलकर समर्थन करते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/राकेशपांडे-hindusthansamachar.in