दवा को बना दिया गया दारू : शिवचरण नेताम
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दवा को बना दिया गया दारू : शिवचरण नेताम

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धमतरी, 16 अक्टूबर (हि.स.)। आदिवासी गोंड समाज के धमतरी जिला अध्यक्ष शिवचरण नेताम ने शुक्रवार को बयान जारीकर कहा कि पहले आदिवासी और वन क्षेत्र में रहने वाले मूल निवासी समाज महुआ रस को शक्तिवर्धक दवा के रूप में उपयोग में लाते थे, लेकिन सभ्यता के बढ़ते चरण में और सनातनी प्रभाव के कारण दवा को दारू का रूप दे दिया गया। आदिवासी समाज ने कभी भी महुआ रस को दारु मानकर ग्रहण नहीं किया। इसे बच्चों को भी स्वास्थ्य के लिए पिलाया जाता था। वन क्षेत्र के आदिवासी समाज को सरकार ने पांच लीटर महुआ शराब बनाने का अधिकार दिया है। वन क्षेत्रों में आदिवासी समाज पर सभ्यता और सनातनी हमले के कारण बेरोजगारी और मानसिक अवसाद बढ़े। वन उपज पर व्यापारियों और दलालों का कब्जा हो गया और समाज में गरीबी आ गई। इसलिए महुआ रस परिवार तक सीमित नहीं रह गया और वे इसे बेचने के लिए विवश हुए। अधिक पैसों के लिए महुआ शराब निर्माण की मात्रा में वृद्धि कर दी गई और उसकी गुणवत्ता में परिवर्तन कर दिया गया। महुआ का रस दवा से दारू बन गया। पांच लीटर शराब बेचकर परिवार का पालन पोषण करना संभव नहीं है। आधुनिकता सनातनी प्रभाव और वनोपज पर दलालों के कब्जा होने के कारण आदिवासी और मूलनिवासी समाज में गरीबी आई। पांच लीटर शराब निर्माण की छूट को बंद करके समाज को शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना चाहिए। शासन-प्रशासन शराब वाली संस्कृति से जोड़कर आदिवासी समाज को बदनाम न करें। हिन्दुस्थान समाचार / रोशन-hindusthansamachar.in