जलाशय जर्जर, खेतों की नहीं बुझ रही प्यास
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जलाशय जर्जर, खेतों की नहीं बुझ रही प्यास

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धमतरी, 02 अगस्त (हि. स.) । लाखों का जलाशय जर्जर हो गया है, लेकिन मरम्मत करने प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। यही वजह है कि उम्मीद पाल रखे किसानों के खेतों तक सिंचाई पानी नहीं पहुंच पा रहा है। प्रभावित किसानों ने जलाशय मरम्मत करने की मांग शासन से की है। नगरी ब्लाक मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बरबांधा में लाखों रूपये की लागत से जलाशय बना है, लेकिन प्रशासन की उदासीनता व देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो गया है। जिसके कारण इस क्षेत्र के हजारों किसान सिंचाई पानी की सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं। जलाशय टूट जाने के बाद ग्रामीणों ने इसकी शिकायत कई बार शासन-प्रशासन से की है, लेकिन उन्हें महज आश्वासन के अलावा आज तक कुछ भी नहीं मिला। बरबांधा के हजारों एकड़ की खेती को सिंचाई सुविधा दे सकने वाले इस जलाशय को टूटे 15 से 20 साल बीतने जा रहा है। इस बीच किसानों की आस टूटती नजर आ रही है। बरबांधा इलाके में जब इस जलाशय का निर्माण हुआ था तो क्षेत्र के किसानों के चेहरे में खुशी की लहर छा गई थी। किसानों को लगने लगा कि 1500 हेक्टेयर की कृषि भूमि अब सिचिंत हो जाएगी, लेकिन बांध के साथ ही किसानों की आस भी टूट गई। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि बरबांधा जलाशय के पानी से लगभग 1500 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई हो रही थी, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते इस बांध का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है। जलाशय की मरम्मत नहीं होने से बरबांधा, घुरावड़, अमोली, आमगांव, भुरसीडोंगरी, भर्रीपारा के किसानों को लगातार तीन साल तक अकाल का मुंह देखना पड़ा है। इस साल भी संतोषजनक बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि वनांचल क्षेत्र के बरबांधा, अमोली घुरावड, आमगांव, भूरसीडोंगरी के किसानों के खेत में अभी तक सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाया। प्रशासन से उम्मीद खो चुके किसानों ने स्वयं चंदा कर राशि एकत्रित की और श्रमदान कर बांध को बांधने का प्रयास किया, लेकिन किस्मत को शायद वह भी मंजूर नही था और उसी शाम हुई बारिश ने बांध की मिट्टी को बहा दिया। इससे किसानों के अरमानों में पानी फिर गया। बजट मिलने के बाद बनेगा बांध इस संबंध में सिहावा विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने कहा कि इस जलाशय को बनाने के लिए लोगों की मांग के अनुरूप जलसंसाधन मंत्री से मांग की है। कार्य बजट में भी शामिल हो गया था, वित्त सचिव अमिताभ जैन से भी मुलाकात कर इस बांध के महत्व को बताते हुए इस बांध को बनाने की मांग की थी, लेकिन सरकार का पहला मुद्दा धान खरीदी था इसलिए यह कार्य क्रियान्वित नही हो सका। पुनः इस वित्तीय वर्ष में बांध को बनाने के लिए बजट में शामिल करने मांग की है। जैसे ही यह बजट आबंटित होता है वैसे ही इस बांध को बना दिया जाएगा। पनवीनाला और फुटहामुड़ा बांध कुकरेल क्षेत्र को भी बनाने के लिए जल संसाधन मंत्री से बजट में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है। हिन्दुस्थान समाचार / रोशन-hindusthansamachar.in