चाकू छुरी तेज करते जिंदगी निकल गई, नहीं आया जीवन में उजियाला, शासन की योजनाओं का भी नहीं मिल रहा लाभ
चाकू छुरी तेज करते जिंदगी निकल गई, नहीं आया जीवन में उजियाला, शासन की योजनाओं का भी नहीं मिल रहा लाभ
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चाकू छुरी तेज करते जिंदगी निकल गई, नहीं आया जीवन में उजियाला, शासन की योजनाओं का भी नहीं मिल रहा लाभ

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शहर के साप्ताहिक बाजार में सालों से आ रहे चाकू छुरी तेज करने वालों से चर्चा धमतरी, 7 सितंबर ( हि. स.)। धमतरी दिनों-दिन बढ़ते मशीनीकरण ने यदि सबसे ज्यादा समाज के किसी वर्ग को प्रभावित किया है, तो वह पुश्तैनी व्यवसाय को संभाल रहे लोहार कारीगरों का है। वर्तमान में यह कार्य हाशिए पर चला गया है। लोहार कारीगरों ने कहा कि अब इस कार्य में पहले जैसी ग्राहकी नहीं होती। पहले गांव में लोहार व अन्य कला के माहिर लोग अपनी-अपनी कला से गांव की जरूरतों को पूरा करते थे। धीरे-धीरे अब गांव से लोहार भी गायब हो गए हैं। शहर के इतवारी बाजार में जरूर कुछ लोहार अपनी कला से लोहे को मनचाहे आकार देते दिखाई दे जाते है। शहर के साप्ताहिक इतवारी बाजार में गांव से कुछ लोहार आकर कैंची, छुरी व अन्य धारदार हथियारों में धार करते हैं। लोहारों का कार्य अब सालभर का न होकर अवसर विशेष का हो गया है। फसल कटाई, दिवाली, दशहरे के समय ही लोहारों की पूछताछ होती है। अपने हुनर से दैनिक उपयोग के सामानों के साथ ही कलात्मक वस्तुएं तैयार करने वाले लोहारों का कार्य कैंची, छुरी, छेनी धार करने तक में सीमित हो गया है। खेतों में बुआई के पहले लोग हल, कुल्हाड़ी व अन्य कृषि यंत्रों को धार करवाते हैं। 50 वर्षीय पुरुषोत्तम विश्वकर्मा ने बताया कि पहले लोहारी कार्य सालभर चलता था। किसानी औजार के अलावा घरेलु उपयोग के लोहे के चमचे, चाकू, कुल्हाड़ी भी बनवाने लोग दुकान तक पहुंचते थे, लेकिन यह सब बीते दिनों की बात हो गई है। अब तो मात्र धार करवाने ही लोग पहुंचते हैं। किशनलाल विश्वकर्मा ने बताया कि वे बचपन से ही लोहारी कार्य कर रहे हैं। अब लोहारी कार्य पहले जैसा नहीं रहा। आधुनिक मशीनों के आ जाने के कारण धंधा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कोयले की बढ़ती कीमतों ने व्यवसाय को काफी महंगा कर दिया है। बावजूद इसके लोग अब भी सस्ते में काम निबटाना चाहते हैं। कैंची, छुरी धार करने में मुश्किल से 10 से 20 रुपए मिलते हैं, जो बढ़ती महंगाई के हिसाब से बहुत कम है। नहीं मिल रहा सहयोग जिस तरह शासन ने धोबियों को दुकान, नाइयों को नाईपेटी, बंसोड़ों को कम कीमत में बांस उपलब्ध करने की योजना बना रखी है, उसी तरह लोहारों के लिए कोई योजना नहीं चलाए जाने से लोहार समुदाय निराश है। उनका कहना है कि शासन की ओर से यदि लोहारों को कार्य बढ़ाने के लिए सहायता नहीं दी जाती है, तो कई लोग इस पुश्तैनी धंधे को छोड़कर दूसरे धंधे को अपना लेंगे। हिन्दुस्थान समाचार / रोशन-hindusthansamachar.in