ऑपरेटरों की सरकार को दो टूक, जब तक राहत नहीं, तब तक नहीं चलाएंगे बसें
ऑपरेटरों की सरकार को दो टूक, जब तक राहत नहीं, तब तक नहीं चलाएंगे बसें

ऑपरेटरों की सरकार को दो टूक, जब तक राहत नहीं, तब तक नहीं चलाएंगे बसें

भोपाल, 17 जून (हि.स.)। मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग के बस ऑपरेटरों को प्रदेश में बस संचालन की अनुमति दो दिन पहले ही दे दी थी। गृह विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिये थे, लेकिन अब बस ऑपरेटर सरकार के इस निर्णय के विरोध में उतर आए हैं। बस ऑपरेटर मार्च से टैक्स माफ करने की मांग कर रहे हैं। तीनों संभागों के बस ऑपरेटरों का कहना है कि जब तक टैक्स माफ नहीं होगा, तब तक बसों का संचालन नहीं होगा। गौरतलब है कि प्रदेशभर में करीब 35 हजार से अधिक यात्री बसें संचालित होती हैं। कोरोना संकट के चलते 23 मार्च से हुए लॉकडाउन के बाद बसों का संचालन बंद हैं, लेकिन एक जून से अनलॉक होने के बाद कुछ जिलों में बस संचालन की अनुमति दे दी गई थी, जबकि भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग के रेड जोन होने के कारण बसों का संचालन बंद था। बीते सोमवार को गृह विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा ने कुछ शर्तों के साथ तीनों संभागों में बस संचालन की अनुमति दी, लेकिन बस ऑपरेटर टैक्स माफ करने की मांग पर अड़ गए हैं। हमारी मांगों पर सरकार करे विचार प्राइम रूट बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने कहा कि हम सरकार से लॉकडाउन की अवधि का टैक्स माफ करने की मांग कर रहे हैं। इसके बाद जब से बसों का संचालन शुरू होगा, उसमें भी टैक्स में रियायत मांग रहे हैं, लेकिन सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। इसको लेकर हमने अनुमति के बावजूद बसें नहीं चलाने का फैसला लिया है। सभी बसें अपने ही स्थान पर खड़ी हैं और जब तक सरकार टैक्समाफी नहीं करेगी तब तक बसों का संचालन बंद रहेगा। इसके साथ ही डीजल के दामों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। इस पर रिबेट देने की मांग भी की जा रही है। हम पहले से ही किराया बढ़ाने की मांग भी कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने इस पर भी ध्यान नहीं दिया। इसको लेकर अब आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है। 3 लाख से अधिक लोगों की रोजी-रोटी संकट में ऑपरेटर और सरकार के बीच में आपसी तालमेल नहीं होने से प्रदेश के यात्री जो सार्वजनिक परिवहन सेवा से यात्रा कर रहे हैं वे तो परेशान हो ही रहे हैं। निजी बसों पर कार्य करने वाले एक लाख दस हजार कर्मचारियों के साथ-साथ लगभग 3 लाख लोगों का परिवार का पालन पोषण सार्वजनिक परिवहन उद्योग के माध्यम से होता है, उनकी रोजी-रोटी भी संकट में है। सडक़ परिवहन कर्मचारी अधिकारी उत्थान समिति मध्य प्रदेश के अध्यक्ष श्याम सुंदर शर्मा का कहना है कि इसका मुख्य कारण मध्य प्रदेश में सडक़ परिवहन निगम का अस्तित्व का नहीं होना है। देश में मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ दो ऐसे राज्य हैं जहां पर पूर्णतत: निजीकरण है और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था निजी ऑपरेटरों की हवाले है। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए ताकि जो स्थिति अब निर्मित हुई व भविष्य में ना हो। इसका एकमात्र विकल्प है सार्वजनिक परिवहन सेवा को सरकार अपने अधीनस्थ ले। साथ ही साथ मध्यप्रदेश में बस ऑपरेटरों की वाहनों का संचालन सडक़ परिवहन निगम के माध्यम से अनुबंध कर किया जाए। जनहित याचिका दायर करने की तैयारी उधर, इस मामले को लेकर सडक़ परिवहन कर्मचारी अधिकारी उत्थान समिति मध्य प्रदेश के अध्यक्ष श्याम सुंदर शर्मा कोर्ट में जनहित याचिका लगाने जा रहे हैं। उनका कहना है कि बसों के संचालन की स्थिति ठीक शराब बिक्री की तरह हो गई है। मतलब सरकार कह रही है बस चलाओ और ऑपरेटर मना कर रहे हैं। इससे जनता परेशान हो रही है। बस ऑपरेट्र्स की मांग है कि लॉक डाउन अवधि अप्रैल, मई एवं जून का टैक्स शून्य हो। सामाजिक दूरी के नियम से बस संचालन करने पर शासन क्षतिपूर्ति दे। आगामी 5 माह यानी अक्टूबर तक टैक्स में छूट प्रदान की जाए। परिवहन उद्योग से जुड़े कर्मचारियों को शासन मानदेय-भत्ता दे। परिवहन कर्मचारियों को कोरोना योद्धा मानकर सरकार बीमा कराए। राज्य के परिवहन आयुक्त वी मधु कुमार का इस संबंध में कहना है कि बस ऑपरेटर्स ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी है। वे तीन माह के टैक्स को माफ करने तथा सोशल डिस्टेंस नियम से बस संचालन करने पर क्षतिपूर्ति मांग रहे हैं। अब सरकार को फैसला करना है। हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर-hindusthansamachar.in

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