आर्गेन पर दुष्प्रभाव रोकने को हाइपर पैराथॉयराइडिज्म का शीघ्र उपचार जरूरी
आर्गेन पर दुष्प्रभाव रोकने को हाइपर पैराथॉयराइडिज्म का शीघ्र उपचार जरूरी
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आर्गेन पर दुष्प्रभाव रोकने को हाइपर पैराथॉयराइडिज्म का शीघ्र उपचार जरूरी

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एम्स रायपुर के एक दिवसीय वेबीनार में नौ देशों के 60 प्रतिभागियों ने चर्चा की रायपुर, 27 जुलाई (हि.स.)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायपुर के तत्वावधान में रविवार को पैराथॉयराइड रोग पर एक दिवसीय वेबीनार आयोजित किया गया, जिसमें नौ देशों के 60 प्रतिभागियों ने इसके उपचार और सर्जरी के बारे में एम्स के विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की। एम्स के सिर एवं गला सर्जरी के अंतर्गत ऑटोराइनोलरींग्लॉजी विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस वेबीनार में निदेशक और सीईओ प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने पैराथॉयराइड सर्जरी के बारे में अपने विस्तृत अनुभव को सभी प्रतिभागियों के साथ साझा किया। उनका कहना था कि पैराथॉयराइड्स मिनट ग्लेंड होती है जो गले में थॉयराइड ग्लेंड के पास पाई जाती है। इससे पैराथॉरमोन हार्मोन का स्राव होता है जो शरीर में कैल्शियम के स्तर को बनाए रखने में मदद देता है। उन्होंने बताया कि पैराथॉयराइड की अति सक्रियता की वजह से हाइपर पैराथॉयराइड्ज्म की स्थिति बन जाती है, जिसका असर शरीर के विभिन्न आर्गेन पर पड़ता है। इसकी वजह से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। किडनी स्टोन की दिक्कत हो सकती है, हड्डियों में दर्द और मांसपेशियों में कमजोरी का अहसास और डिप्रेशन होने लगता है। रक्त में कैल्शियम और पैराथोरमोन के लेवल की जांच कर इसकी जांच की जा सकती है। इसे ग्लेंड की सर्जरी कर ठीक किया जा सकता है। एम्स रायपुर अभी तक ऐसे 10 रोगियों की पहचान कर उन्हें उपचार प्रदान कर चुका है। ईएनटी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रूपा मेहता ने पैराथॉयराइड और एम्स रायपुर में इससे संबंधित विभिन्न सर्जरी के बारे में प्रतिभागियों को जानकारियां दी। उन्होंने कहा कि यदि अनुभवी चिकित्सकों से इसकी सर्जरी करवा ली जाए तो इससे कई बीमारियों से बचा जा सकता है और जीवन सामान्य बन सकता है। वेबीनार में कर्नाटक के चित्रादुर्गा के प्रो. (डॉ.) प्रहलाद एनबी ने भी विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। इसमें नौ देशों के 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया। हिन्दुस्थान समाचार/चंद्रनारायण शुक्ल-hindusthansamachar.in