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निजी अस्पतालों में कोरोना के नाम पर चांदी

निजी अस्पतालों में कोरोना के नाम पर चांदी

निजी अस्पतालों में कोरोना के नाम पर चांदी - सर्दी-जुखाम से भी लोगों में दहशत -500 से 1500 की बनाई जा रही पर्चियां जयपुर, 21 मार्च (हि.स.)। कोरोना वायरस के कारण निजी अस्पतालों में दहशत दिख रही है। कोरोना संदिग्ध मरीजों की बढ़ती संख्या देखते हुए निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं दिख रहे

है। शहर के कुछ बड़े निजी अस्पताल को छोड़ दे तो अधिकांश अस्पतालों में मरीजों के बचाव के इंतजाम नाकाफी दिखे और कई जगहों पर लोगों को उपचार करने की बजाए एसएमएस अस्पताल जाने की सलाह दी गई। कोरोना वायरस के प्रभाव के कारण कई निजी अस्पतालों में आईसोलेशन का इंतजाम नाकाफी है। वहीं सर्दी-जुखाम के मरीजों की जांच के नाम पर 500 से लेकर 1500 का बिल बनाया जा रहा है। इसके बाद भी मरीज को किसी तरह की कोई राहत नहीं मिल पा रही है। हालात यह है कि निजी अस्पताल, क्लिेनिक में आने वाले मरीजों की जांच के नाम पर मोटी फीस वसूली जा रही है वहीं मरीजों को घर में रहने की सलाह दी जा रही है। इसके बाद भी मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। मानसरोवर निवासी विमला शर्मा ने बताया कि उनकी वृद्ध माता को सर्दी-जुखाम हो गया इसके बाद निजी अस्पताल में दिखाने के बाद 1000 का पर्ची बना दी। डॉक्टर ने दवाइयां थमाकर घर में रहने की सलाह दी लेकिन किसी प्रकार की जांच नहीं की गई। इन अस्पतालों में भी कोरोना की दहशत अस्पताल स्टॉफ में दिख रही है। कई अस्पतालों में ज्यादा खांसी-जुकाम या वायरल वाले मरीजों को प्रवेश देने की बजाए एसएमएस जाने कीे कहा जा रहा है। इन मरीजों को यहां पर भर्ती नहीं किया जा रहा है। कॉलोनियों के बने अंदर अस्पतालों में मरीजों को संक्रमण से रोकने के इंतजाम भी पुख्ता नहीं दिख रहे है तो कई क्लिेनिक सेंटर और जांच सेंटर बंद हो चुके है। गुर्जर की थड़ी निवासी सुनील पासवानी ने बताया कि कोरोना प्रभावित मरीजों का समय पर उपचार जरूरी है। ऐसे में निजी अस्पतालों में लोगों को परेशान होना पड़ता है। इन अस्पतालों में उपचार नहीं मिल पा रहा है।संदिग्धत मरीजों को बिना उपचार के एसएमएस भेजा रहा है। हिंदुस्तान समाचार/ प्रशांत/संदीप
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