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पुरूष प्रधान सोच महिलाओं को नायक के तौर पर नहीं स्वीकारते : आमिर

पुरूष प्रधान सोच महिलाओं को नायक के तौर पर नहीं स्वीकारते : आमिर

सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड की कई फिल्मों में काम कर चुके 52 साल के अभिनेता ने कहा कि वह समानता में पूरी तरह से विश्वास करते हैं लेकिन बदलाव तब ही होगा जब समाज के रवैये में एक आमूलचूल परिवर्तन हो         उन्होंने कहा बदकिस्मती से ऐसा हुआ है कि हमारे ज्यादातर स्टार पुरूष हैं जो लोग दर्शकों को सिनेमाघरों की तरफ खींचकर लाते हैं वे पुरूष हैं और यह हमारे समाज पर पितृसत्तात्मक प्रभाव का परिणाम है           उन्होंने यहां एक साक्षात्कार में कहा हम महिलाओं को नायकों के तौर पर नहीं देखते हम इस तरह की सोच बचपन से ही अपने दिमाग में भरना शुरू कर देते हैं इसे लेकर एक आमूलचूल बदलाव लाना
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