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धारा 309 के तहत 2 महीने में पूरा नहीं हो सकता रेप ट्रायल- रिसर्च

कानून मंत्रालय द्वारा किए गए 15 महीने के एक लंबे अध्ययन के बाद ये बात सामने निकल कर आई है कि बलात्कार से पीड़िता का ट्रायल दो महीने में होना वास्तविकता से परे है। इस रिसर्च में सामने आया है कि केस दर्ज होने के दो महीने बाद सीआरपीसी की धारा 309 के तहत ट्रायल पूरा करना अव्यवहारिक है। इस अध्ययन में धारा 309 के प्रावधान के विपरीत कहा गया है कि दो महीने में तो पीड़िता के हालात का भी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। पीड़िता की असली स्थिति का अंदाजा 8 से साढ़े 8 महीने में लगाया जा सकता है और कुछ मामलों में तो 15 महीनों का समय भी लग जाता है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रायल में देरी कई कारणों से
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