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दशहरा विशेष : राक्षस संस्कृति का संरक्षक रावण

दशहरा विशेष : राक्षस संस्कृति का संरक्षक रावण

दक्षिण भारत में सुबेल पर्वत पर स्थित सुवर्ण निर्मित अति संपन्न लंकानगरी को दैत्यों ने अपने शौर्य और पराक्रम से बसाया था। इस नगरी की संपन्नता से लालायित देवताओं ने आक्रमण कर लंका को अपने अधिकार में ले लिया और इन देवताओं ने कुबेर को लंका का राजा बना दिया। देवताओं से भयभीत ये दैत्य परिवार सहित पाताल लोक में जा पहुंचे। वहां ब्राह्मण कुल के महर्षि पुलस्त्य ने इन दैत्यों को अपने आश्रम में शरण दी। पुलस्त्य ऋषि का पुत्र विश्रवा दैत्यों के साथ आई कन्या कैकसी पर मोहित हो गया। फलस्वरूप कैकसी ने तीन पुत्र रावण कुंभकर्ण और विभिषण और एक पुत्री शूर्पणखा को जन्म दिया।इस तरह आर्य जाति
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