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बिना खेत की जुताई किए किसान करा सकेंगे अब गेहूं की बोनी, होगी आसानी

बिना खेत की जुताई किए किसान करा सकेंगे अब गेहूं की बोनी, होगी आसानी

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जिले में 10 जनवरी से पहले गेहूं की बुआई नहीं हो पाती है। जबकि नवंबर व दिसंबर में गेहूं की बोने का समय होता है। गेहूं की बोआई में देरी होने से उस की पैदावार के साथ क्वालिटी पर भी असर पड़ता है। कृषि वैज्ञानिक विजय कुमार जैन ने बताया कि जीरो टिलेज तकनीक को किसान आसानी से अपना सकते हैं। इससे लागत में भी कमी आती है। धान की फसल की कटाई के तुरंत बाद उसी खेत को बिना जोते हुए जीरो सीड ड्रिल से गेहूं को बोया जाता है। इसी को जीरो टिलेज तकनीक कहा जाता है।
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