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इसे सुधार के संकेत कहें या फिर त्योहारों से पहले मांग में बढ़ोतरी, अगस्त में

इसे सुधार के संकेत कहें या फिर त्योहारों से पहले मांग में बढ़ोतरी, अगस्त में

इससे जीएसटी के कारण औद्योगिक उत्पादन के प्रभावित होने की आशंका भी काफी हद तक दूर हो गई है। फिलहाल यह पता लगाना मुश्किल है कि इसका देश की सकल घरेलू उत्पाद वृद्घि पर कितना प्रभाव पड़ेगा क्योंकि आईआईपी एक सूचकांक है जबकि जीडीपी में मूल्यवद्र्घन को भी ध्यान में रखा जाता है। अलबत्ता अगस्त में खुदरा महंगाई 338 फीसदी रही जो जुलाई में यह 236 फीसदी पर थी। जून में महंगाई की दर 146 फीसदी थी। इसलिए मोटे तौर पर अगस्त में मूल्य वद्र्घन आईआईपी की तरह ऊंचा नहीं हो सकता लेकिन जीडीपी वृद्घि के लिए सितंबर के आईआईपी के आंकड़े कम होंगे। चालू वित्त वर्ष के पहले 5 महीनों में अप्रैल से अगस्त के दौरान
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