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रोहिंग्या के दर्द पर ख़ामोश क्यों है दुनिया?

रोहिंग्या के दर्द पर ख़ामोश क्यों है दुनिया?

सवाल था "तलाक़ के मामले के वक़्त हमारे प्रधानमंत्री ने कहा था कि वो औरतों से हमदर्दी रखते हैं औरतों के साथ हैं क्या वो मां-बहनें नहीं हैं हमारी?" ये सवाल था शमा ख़ान काउनके साथ खड़ी अस्मत ने पूछा "पूरी नस्ल को ख़त्म किया जा रहा है बच्चों तक को भाले-बर्छियां भोंककर टांग दिया जा रहा है औरतों की आबरू लूटी जा रही है दुनिया ख़ामोश क्यों है? क्या ये आतंकवाद नहीं है?"'आंग सान सू ची यही तुम्हारा असली चेहरा है' 'रोहिंग्या का नरसंहार बंद करो' 'शेम-शेम' और 'होश में तुमको आना होगा'; जैसे पोस्टर लिए और नारे लगाते दिल्ली के दूतावासों वाले इलाक़े चाणक्यपुरी में जमा हुई दो-तीन हज़ार
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